जयसिंहपुरा जैन मंदिर
क्षिप्रा तट के समीप दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, जहाँ मालवा की लगभग 560 प्राचीन जैन प्रतिमाओं का संग्रहालय है
आज का समय-क्रम. समय भारतीय मानक समय में.
उज्जैन के पश्चिमी भाग में क्षिप्रा नदी के समीप जयसिंहपुरा का दिगम्बर जैन मंदिर जैन तीर्थ निर्देशिकाओं में श्री नेमिनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र एवं पुण्य भूमि के नाम से दर्ज है। इसके पास ही दिगम्बर जैन संग्रहालय है, जिसकी स्थापना सन् 1944 में श्री दिगम्बर जैन मालवा प्रांतिक सभा, बड़नगर ने की थी और जिसमें मालवा अंचल से एकत्र लगभग 560 जैन प्रतिमाएँ और शिल्पखंड सुरक्षित हैं। जिनालय और संग्रहालय मिलकर जयसिंहपुरा को उज्जैन की प्राचीन जैन विरासत से परिचय का प्रमुख स्थान बनाते हैं।
- परंपरा
- दिगम्बर जैन
- मूलनायक
- भगवान नेमिनाथ, बाईसवें तीर्थंकर (जैन तीर्थ निर्देशिकाओं के अनुसार)
- तीर्थ का प्रकार
- अतिशय क्षेत्र एवं पुण्य भूमि
- स्थान
- जयसिंहपुरा, पश्चिमी उज्जैन, क्षिप्रा तट के समीप
- संग्रहालय की स्थापना
- सन् 1944, श्री दिगम्बर जैन मालवा प्रांतिक सभा, बड़नगर द्वारा
- संग्रहालय का संग्रह
- मालवा व आसपास के क्षेत्रों की लगभग 560 जैन प्रतिमाएँ और पुरावशेष
- नया संग्रहालय भवन
- पुनर्निर्माण के बाद अप्रैल 2015 में पुनः आरंभ
- संग्रहालय का समय
- प्रातः 8 बजे से सायं 7 बजे तक, सभी दिन (संग्रहालय की अपनी वेबसाइट के अनुसार)
समय
खुलने का समय
- जैन संग्रहालय (दिगम्बर जैन संग्रहालय)सभी दिनसुबह 8:00 से शाम 7:00
संग्रहालय की अपनी वेबसाइट के अनुसार (2017 से 2026 के आरंभ तक की संग्रहीत प्रतियाँ)। वेबसाइट फिलहाल बंद है, इसलिए जाने से पहले स्थानीय स्तर पर पुष्टि कर लें।
पर्व, ग्रहण और विशेष अवसरों पर समय बदल सकता है। यात्रा से पहले मंदिर में पुष्टि कर लें।
पूरा समय-क्रम देखेंपूजन व विधान
ऑनलाइन केवल स्थान सुरक्षित होता है। इस वेबसाइट पर कोई राशि नहीं ली जाती।
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जिनाभिषेक
जिन प्रतिमा का शुद्ध जल से प्रातःकालीन अभिषेक, जो दिगम्बर जिनालयों में दैनिक पूजा का पहला अंग है। जयसिंहपुरा में इसका निश्चित समय प्रकाशित नहीं है; मंदिर में पूछ लें।
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शांतिधारा
विश्व शांति की भावना से शांतिधारा मंत्रों के पाठ के साथ प्रतिमा पर जल की अखंड धारा; दिगम्बर परंपरा में यह अभिषेक के बाद होती है। इसके लिए व्यवस्था मंदिर प्रबंधन से की जाती है।
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नित्य पूजन (अष्ट द्रव्य पूजा)
देव, शास्त्र और गुरु की दैनिक पूजा, जिसमें आठ पारंपरिक द्रव्य चढ़ाए जाते हैं: जल, चंदन, अक्षत, पुष्प (प्रायः रंगे चावल), नैवेद्य, दीप, धूप और फल; अंत में अर्घ्य चढ़ाया जाता है।
वर्ष भर के पर्व
- कार्तिक कृष्ण अमावस्या (अक्टूबर-नवंबर)
महावीर निर्वाण दिवस (दीपावली)
पावापुरी में भगवान महावीर के निर्वाण का दिन; दिगम्बर मंदिरों में प्रातःकाल निर्वाण लाडू चढ़ाया जाता है।
- चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (मार्च-अप्रैल)
महावीर जयंती (जन्म कल्याणक)
चौबीसवें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म कल्याणक, जिसे जैन मंदिरों में अभिषेक, पूजन और सामूहिक शोभायात्रा के साथ मनाया जाता है।
- वैशाख शुक्ल तृतीया (अप्रैल-मई)
अक्षय तृतीया
भगवान आदिनाथ के दीर्घ उपवास के बाद प्रथम आहार की स्मृति, जब राजा श्रेयांस ने उन्हें इक्षु रस का आहार दिया।